परिवार
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जहाँ डर ठहरता है
मैं सोचता था कि मैं उन लोगों में से हूँ जिन्हें डर या दहशत छू भी…
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दूसरी साँस
“जोंगशिक! जोंगशिक! मेरे हाथ-पाँव नहीं हिल रहे! नहीं हिल रहे!” मैं भारत के एक विश्वविद्यालय अस्पताल…
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चाँदनी के नीचे, हम तीन
वाह, चाँदनी कितनी उजली है। मैंने सिर उठाकर आसमान की ओर देखा। मेरी उम्र शायद छह…