
मैं जापानी शैली की एक पुरानी इमारत के भीतर गया।
लकड़ी के खंभे, जालीदार दरवाज़े और तातामी बिछे कमरे। दीवारों पर ऐसी तस्वीरें टँगी थीं जिन पर समय की छाप थी। एक ओर मशहूर लोगों के हस्ताक्षर भी सजे थे।
इमारत ने लंबा समय देखा था, लेकिन उसकी देखभाल अच्छी तरह की गई थी।
लकड़ी की वह खास गंध मुझे अच्छी लगी। उस जगह में बसा पुरानापन भी मन को भाया।
सरकने वाले दरवाज़े के पार एक छोटा-सा आँगन दिख रहा था।
लकड़ी की खिड़कियों के चौखटे और काँच के दरवाज़े बगीचे को किसी तस्वीर की तरह घेरे हुए थे। बगीचे में पेड़ और पत्थर थे।
मैं तातामी वाले कमरे में बैठकर वह दृश्य देखता रहा।
इमारत के भीतर ऐसा छोटा-सा बगीचा होना अच्छा लगा। वह पुराने घर के माहौल में खूब जँच रहा था।
यह ओसाका के शिन्साइबाशी में ओमुराइस का रेस्तराँ ‘होक्क्योकुसेई’ था। इस नाम का अर्थ है ध्रुव तारा।
1922 में खुले इस रेस्तराँ को जापानी ओमुराइस की शुरुआत करने वाली जगहों में से एक माना जाता है।
रेस्तराँ में सुनाई जाने वाली कहानी के अनुसार, 1925 में मालिक ने एक नियमित ग्राहक के लिए नया व्यंजन बनाया था। उस ग्राहक का पेट ठीक नहीं रहता था और वह हमेशा ऑमलेट के साथ सादा चावल खाता था। नए व्यंजन में चावल को अंडे की परत में लपेट दिया गया था।
कहते हैं, इस तरह ओमुराइस का जन्म हुआ।
आज का शिन्साइबाशी मुख्य रेस्तराँ उस इमारत में नहीं है जहाँ शुरुआत हुई थी। फिर भी, इसमें पुराने जापानी घर का रूप बचा हुआ है।
ओसाका की यात्रा की तैयारी करते समय ही मैंने यह रेस्तराँ ढूँढ़ रखा था।
एक ऐसी जगह जहाँ पहली बार ओमुराइस बनाए जाने की बात कही जाती है। इतने वर्षों से बनते आए उस व्यंजन को मैं वहीं जाकर खाना चाहता था।
मुझे ऐसी पुरानी जगहें पसंद हैं।
पुराने घर भी अच्छे लगते हैं और पुरानी चीज़ें भी। कोरिया में भी मैं पुराने रेस्तराँ खोजकर जाता हूँ। किसी चीज़ पर बीते समय के निशान दिखें तो जाने क्यों उसे अपने पास रखने का मन करता है।
यहाँ से गुज़रने वाले लोगों ने कैसी ज़िंदगी जी होगी? वह चीज़ कितने हाथों से होकर गुज़री होगी?
पुराना होने का अर्थ है उतने समय से होकर गुज़रना। किसी के हाथों सहेजी गईं, कभी भुला दी गईं, फिर भी आज तक बची रह गईं चीज़ें।
मुझे वह समय अच्छा लगता है जिसे उन्होंने सहा है, जिया है।
शायद इस चाह में थोड़ा लालच भी है।
शायद उस घर में कुछ देर ठहरकर ही मैं एक साथ वह लंबा समय महसूस करना चाहता हूँ, जिसे मैंने जिया नहीं है।
काली प्लेट पर पीला ओमुराइस आया।
अंडे की मुलायम परत ने फ्राइड राइस को लपेट रखा था। एक ओर लाल सॉस परोसा गया था।
देखने में वह आम ओमुराइस से बहुत अलग नहीं था।
मैंने चम्मच से उसका एक किनारा खोला।
अंडे की पतली परत के नीचे फ्राइड राइस दिखा।
मैंने एक चम्मच भरकर मुँह में रखा।
अरे वाह!
जीभ को छूते ही पहला एहसास था, ‘पिघल रहा है।’
क्या ऑमलेट इतना मुलायम भी हो सकता है?
अंडा मुँह में धीरे से घुल गया। उसके साथ फ्राइड राइस और सॉस का स्वाद मिल गया।
ओमुराइस सचमुच बहुत स्वादिष्ट था।
लेकिन शायद उसका स्वाद इतने लंबे समय तक याद रहने की वजह सिर्फ़ खाना नहीं था।
पुरानी लकड़ी की गंध, तातामी वाले कमरे का माहौल और सरकने वाले दरवाज़े के पार दिखता आँगन।
क्या उस जगह का एहसास भी खाने में मिला एक और मसाला नहीं था?
यात्रा से लौटने के बाद भी उस दिन का ओमुराइस कभी-कभी याद आता रहा।
सौ बरस का इतिहास सँजोए वह व्यंजन और समय की छाप लिए वह घर। वहाँ बिताया थोड़ा-सा समय भी उनके साथ याद रह गया।
उस दिन मैंने एक पुराने घर में सौ बरस का समय खाया था।






प्रातिक्रिया दे